
गोरखपुर। दुबई/अजमान (UAE) में फंसे कुशीनगर जनपद के तीन भारतीय नागरिकों की सुरक्षित स्वदेश वापसी को लेकर मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पीड़ितों के परिजनों ने ईमेल, भारत सरकार के मदद पोर्टल और सोशल मीडिया (ट्वीट) के माध्यम से Embassy of India, Abu Dhabi को औपचारिक शिकायत भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। शिकायत में गोरखपुर में कूड़ाघाट स्थित एजेंट श्री साईं ट्रेनिंग एंड टेस्ट सेंटर पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
60-60 हजार रुपये लेकर भेजा गया UAE
शिकायत के अनुसार जैनुल अली (पासपोर्ट संख्या: S219539), कलिंदर शर्मा (पासपोर्ट संख्या: C1354855) और मुसाहेब अली अंसारी (पासपोर्ट संख्या: S1319539) को एजेंट धर्मेंद्र यादव द्वारा नौकरी, आकर्षक वेतन और बेहतर कार्य-शर्तों का झांसा देकर प्रत्येक से 60 हजार रुपये वसूल कर UAE भेजा गया। तीनों का स्थायी पता ग्राम मंगलपुर कन्हौली, पोस्ट पैकाली, थाना अहिरौली, जनपद कुशीनगर (उ.प्र.) बताया गया है। वर्तमान में वे अल रशीदिया-1, अजमान (UAE) में रह रहे हैं।
पहुंचते ही बदली शर्तें, अमानवीय हालात का आरोप
परिजनों का आरोप है कि UAE पहुंचने के बाद उन्हें पता चला कि नौकरी और वेतन संबंधी वादे पूरी तरह झूठे थे। वर्तमान में तीनों आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। असुरक्षित व अमानवीय परिस्थितियों में रहने को मजबूर हैं।
उचित रोजगार सहायता से वंचित हैं
पासपोर्ट और दस्तावेजों की स्थिति स्पष्ट नहीं है,शिकायत में यह भी आरोप है कि कंपनी में काम पर लगाने के नाम पर उन्हें “सप्लायर” को सौंप दिया गया। घर वापसी की बात करने पर पासपोर्ट जब्ती, धमकी और डेढ़ लाख रुपये जमा करने की शर्त रखी जा रही है।
सैकड़ों लोगों के फंसे होने का दावा
परिजनों का कहना है कि बिना वैध फर्म, संस्था या कंपनी पंजीकरण के विदेशों में लोगों को सप्लाई किया जा रहा है और ऐसे सैकड़ों लोग वहां फंसे पड़े हैं। संबंधित कंपनी के रूप में Tilal Al Wadi Building Construction LLC का नाम भी शिकायत में दर्ज है।
दूतावास से की गई तीन प्रमुख मांगें
परिजनों ने Embassy of India, Abu Dhabi से मांग की है कि—
पूरे मामले की तत्काल जांच कराई जाए।
संबंधित कंपनी और एजेंट के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए।
तीनों भारतीय नागरिकों की सुरक्षित भारत वापसी सुनिश्चित की जाए।
मामले को अत्यंत गंभीर और मानवीय आधार पर तत्काल हस्तक्षेप योग्य बताते हुए परिजनों ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय से भी संज्ञान लेने की अपील की है।
अब देखना होगा कि भारतीय दूतावास और संबंधित एजेंसियां इस मामले में कितनी शीघ्र कार्रवाई करती हैं और फंसे हुए भारतीय नागरिकों को कब तक राहत मिलती है।




